Shekhar Solanki

प्रश्न.
उस स्थान पर नति कोण कितना होगा जहाँ पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का ऊर्ध्वाधर घटक तथा क्षैतिज घटक का 

\frac{1}{\sqrt{3}}

 अनुपात है ?
उत्तर:
दिया है :

\frac{\mathrm{B}_{\mathrm{V}}}{\mathrm{B}_{\mathrm{H}}}=\frac{1}{\sqrt{3}}
RBSE Solutions for Class 12 Physics Chapter 8 चुम्बकत्व एवं चुम्बकीय पदार्थों के गुण 3

प्रश्न 1.
भू-चुम्बकत्व के अवयव कौन-कौन से हैं ? इनकी परिभाषा दीजिए। इनको एक नामांकित आरेख में दर्शाइए।
उत्तर
भू-चुम्बकत्व के अवयव (Elements of Earth’s Magnetism)
किसी स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकत्व का विधिपूर्वक अध्ययन करने । के लिए जिन राशियों की आवश्यकता होती है, उन्हें उस स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के अवयव (elements of magnetic field) कहते हैं। पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के तीन अवयव हैं-
(i) दिक्पात कोण
(ii) नति कोण
(iii) पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का क्षैतिज घटक।

RBSE Solutions for Class 12 Physics Chapter 8 चुम्बकत्व एवं चुम्बकीय पदार्थों के गुण 12

(i) दिक्पात कोण (Angle of Declination)- किसी स्थान पर स्वतन्त्रतापूर्वक लटके हुए चुम्बक की अक्ष से गुजरने वाले ऊर्ध्वाधर तल (vertical) को चुम्बकीय याम्योत्तर (magnetic meridian) कहते हैं। इसी प्रकार किसी स्थान पर पृथ्वी के भौगोलिक अक्ष से गुजरने वाले ऊध्र्वाधर तल को भौगोलिक याम्योत्तर (geographical meridian) कहते हैं।

किसी स्थान पर चुम्बकीय याम्योत्तर एवं भौगोलिक याम्योत्तर के मध्य जो न्यूनकोण (acute angle) बनता है, उसे उस स्थान पर दिक्पात कोण कहते हैं। इसे ϕ से व्यक्त करते हैं।
दिक्पात कोण उच्चतर अक्षांशों पर अधिक एवं विषुवत् रेखा के पास कम होता है, भारत में दिक्पति का मान कम है, यह दिल्ली में 0°41’E एवं मुम्बई में 0°58’W है।

) नमन कोण अथवा नति कोण, (Angle of Dip)- यदि किसी चुम्बकीय सुई को उसके गुरुत्व केन्द्र (centre of gravity) से स्वतन्त्रतापूर्वक इस प्रकार लटकाया जाये कि वह ऊध्र्वाधर तल (vertical plane) में स्वतन्त्रतापूर्वक घूर्णन गति (rotational motion) कर सके तो स्थिर होने पर सुई की अक्ष क्षैतिज दिशा से कुछ झुकी हुई रहती है। इस दशा में सुई की चुम्बकीय अक्ष पृथ्वी के परिणामी चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा व्यक्त करती है। चुम्बकीय सुई की अक्ष जिस कोण से क्षैतिज (horizontally) के साथ झुकी रहती है उसे ही नमन कोण कहते हैं।

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इस प्रकार “स्वतन्त्रतापूर्वक लटकायी हुई चुम्बकीय सुई की अक्ष (axis of magnetic needle) क्षैतिज दिशा के साथ जो कोण बनाती है उसे नति कोण या नमन कोण कहते हैं।” चित्र 8.23 में नति कोण को 8 से व्यक्त किया गया है। दूसरे शब्दों में, हम कह सकते हैं कि पृथ्वी का परिणामी चुम्बकीय क्षेत्र क्षैतिज रेखा के साथ जो कोण बनाता है उसे ही नमन कोण कहते हैं।
ध्रुवों पर नमन कोण (angle of dip) का मान 90° एवं भूमध्य रेखा पर 0° (शून्य) होगा । अन्य स्थानों पर नमन कोण का मान 0° से 90° के मध्य होगा।

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iii) पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का क्षैतिज घटक (Horizontal Component of Earth’s Magnetic Field)- चूँकि ध्रुवों पर नमन कोण 90° होता है अतः ध्रुवों पर पृथ्वी का परिणामी चुम्बकीय क्षेत्र पृथ्वी की सतह के लम्बवत् होगा और इसी प्रकार भूमध्य रेखा पर पृथ्वी की सतह के समान्तर होगा। अन्य स्थानों पर यह क्षैतिज के साथ किसी कोण पर होगा जिसे नमन कोण कहते हैं। चित्र 8.23 में नमन कोण θ से प्रदर्शित किया गया है और पृथ्वी के परिणामी चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता B से प्रदर्शित की गई है।
अतः पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का क्षैतिज घटक (horizontal component) H = B cos θ ………….. (1)
पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का ऊर्ध्व घटक (vertical components)
V = B sin θ …………. (2)
समी. (1) व (2) से,

यदि किसी स्थान पर नमन कोण (angle of dip) θ एवं दिक्पात कोण (angle of declination) ϕ के ज्ञात हो तो उस स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र B की दिशा निर्धारित की जा सकती है। यदि क्षैतिज घटक H ज्ञात हो और 8 ज्ञात हो तो समी. (1) से B का मान ज्ञात किया जा सकता है।

स्पष्ट है कि θ, ϕ तथा H ज्ञात होने पर किसी स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का पूर्ण ज्ञान हो जाता है, इसीलिए इन तीनों को भू-चुम्बकत्व के अवयव (elements of earth’s magnetism) कहते हैं। ध्यान रखने योग्य तथ्य यह है कि नति कोण एवं दिक्पात कोण का मान न केवल एक स्थान से दूसरे स्थान पर बदलता रहता है बल्कि एक ही स्थान पर समय के साथ अनियमित (irregular) रूप से बदलता रहता है।

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